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2.45 lakh cases in UP Family courts. Need 17 yrs to clear them Even IF no new cases filed !! फैमिली कोर्ट में 2.45 लाख केस, नए न आएं तो भी निपटाने में लगेंगे 17 साल

कैसे मिले न्याय: फैमिली कोर्ट में 2.45 लाख केस, नए न आएं तो भी निपटाने में लगेंगे 17 साल

अभिषेक यादव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 09 Jul 2017 11:55 AM IST
SOURCE : AMAR UJJALA
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यूपी की पारिवारिक अदालतों में लंबित मुकदमों की संख्या 2.45 लाख के पार पहुंच चुकी है। अमर इन अदालतों में नए केस न भी आएं तो मौजूदा सभी मामलों को निपटाने में 17 साल लग जाएंगे। ऐसा इ‌सलिए क्योंकि 190 फैमिली कोर्ट में से केवल 42 में ही जज हैं। ये हकीकत इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के एक फैसले में सामने आई है

यह खंडपीठ फैमिली कोर्ट को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में अप्रैल 2017 तक के लंबित केसों की संख्या का हवाला दिया गया था।

इस पर जस्टिस श्रीनारायण शुक्ला और जस्टिस शिव कुमार सिंह- प्रथम ने कहा, अगर मान लिया जाए कि मई से एक भी केस दायर नहीं हो और पारिवारिक अदालतों को वैसे ही चलने दिया जाए, जैसे ये अभी चल रही हैं तो इन सभी मामलों पर फैसला सुनाने में 17 साल लग जाएंगे। याचिका न्यायिक अधिकारियों की संस्‍था यूपी न्यायिक सेवा संघ के महासचिव ने दायर की थी।

प्रदेश में 190 पारिवारिक अदालतें पर 42 में ही जज, यानी 148 खाली

26 मई, 2017 तक के आंकड़ों के अनुसार पारिवारिक मामले निपटाने के लिए यूपी में प्रमुख जज और अपर प्रमुख जजों की 190 अदालतें बनाई गई हैं। लेकिन, सहायक रजिस्ट्रार द्वारा दी गई जानकारियों के अनुसार इनमें सिर्फ 42 न्यायिक अधिकारी ही काम कर रहे हैं। 148 अदालतें खाली हैं। इसलिए लंबित मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं।

याचिका में पारिवारिक अदालतों के दो अलग-अलग नियमों पर सवाल
1. यूपी फैमिली कोर्ट्स रूल्स, 1995 के नियम 36 के अनुसार पारिवारिक न्यायालयों को हाईकोर्ट के अधीन काम करना होगा।

2. यूपी फैमिली कोर्ट्स रूल्स, 2006 के अनुसार फैमिली कोर्ट के जज जिला जजों के प्रशासनिक और विभागीय नियंत्रण में होंगे। इसके बाद समस्त नियंत्रण हाईकोर्ट का होगा।

याची का तर्क
याची संगठन के अनुसार, ये दोनों नियम विरोधीभासी हैं। जजों की समितियों ने कई बार 2005 के नियम को नकारते हुए पारिवारिक अदालतों को हाईकोर्ट के अधीन रखने की सिफारिश की थी, लेकिन सरकार अब तक कोई निर्णय नहीं ले सकी है।